भोजपुरी गजल Bhojpuri Gajal











जिनिगी पहाड़ जइसन लागे कबो-कबो
सुखला में बाढ़ जइसन लागे कबो-कबो

कुछुओ कहाँ बा आपन, झूठो के बा भरम
साँसो उधार जइसन लागे कबो-कबो

सभकर बा हाथ पसरल मंदिर में देखलीं
दुनिया भिखार जइसन लागे कबो-कबो

डोली ई देह लागे, दुलहिन ई आत्मा
जिनिगी कँहार जइसन लागे कबो-कबो

होखे महल या मड़ई पर प्यार के बिना
सगरो उजाड़ जइसन लागे कबो-कबो

जहिया से नेह लागल ‘भावुक’ के गीत से
नफरत दुलार जइसन लागे कबो-कबो

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पटना दूरदर्शन के भोजपुरी धारावाहिक ‘ तहरे से घर बसाएब’ [ कथा,पटकथा,संवाद एवं गीत- मनोज भावुक ] मे फिल्मावल गजल



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